खेल जगत

“जेंटलमैन गेम” के बदलते चेहरे

क्रिकेट जिसका नाम सुनते ही हमारे मन में वह तमाम चेहरों की कल्पना होने लगती है जिन्होंने इस खेल को खेल ना समझ कर बल्कि इसे अपना धर्म, कर्म और अपनी पहचान बना कर इसे इस मुकाम तक ले गए और शायद इन जैसे खिलाड़ियों को अपना आदर्श मानकर जाने कितने देशों, शहरो में नए सपने, नए खिलाड़ी तरासे जाते हैं। यूं तो क्रिकेट का इतिहास बहुत पुराना है, फिर भी आइए हम इसे समझने की कोशिश करते हैं। क्रिकेट की शुरूआत देखा जाए तो 16 वीं शताब्दी में हुई थी। जिसकी नींव रखी थी इंग्लैंड ने. एक ऐसा देश जहां से फुटबॉल, बैडमिंटन, हॉकी आदि खेलों का उद्गम हुआ।इधर क्रिकेट जुनून बन कर पूरी दुनिया पर हावी हो गया। इस खेल की सफर की बात करे तो टेस्ट मैच से होकर 50 ओवर और उसके बाद क्रिकेट का मनोरंजन बढाने के लिए 20 ओवर का कर दिया गया। हालांकि खेल भावना को तवज्जो ना देकर मनोरंजन को देना चिंता का विषय बनता जा रहा है। जिस तरह से क्रिकेट में गुगली, स्टेट ड्राइव, कवर ड्राइव जैसे खूबसूरत शब्दावली है. ठीक वैसे ही इसके उलट एक शब्दावली आती है जिनमे दागी शब्द जैसे मैच फिक्सिंग, स्लेजिंग, बॉल टेंपरिंग, अभद्र भाषा इस खेल को गैर अनुशासन का परिचय देते है. तो ये कहना कतई गलत नहीं होगा. कहा जाता है क़ि खेल भावना का परिचय देना है, तो क्रिकेट का उदाहरण ले।हालात यह है क़ि उदाहरण खेल का लिया जाये या उन खिलाड़ियों का जिन्होंने इसे ‘खेल’ बना दिया हो।

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विवाद का पिटारा खोले तो नाम आता है ‘स्पॉट फिक्सिंग’ का. एक ऐसा विवाद या हम कहे कि क्रिकेट का ऐसा कलंक जिसकी कालिख दक्षिण अफ्रीका,पाकिस्तान यहां तक की भारत पर भी लग चुकी है। जिसमे दक्षिण अफ्रीकी कप्तान हैंसी क्रोनिए, भारतीय कप्तान अजहरुद्दीन, श्रीसंथ या फिर पाकिस्तान की वो चर्चित तिकड़ी(सलमान बट, आसिफ अली,मो.आमिर) जिसने पाकिस्तान को न जाने किस अंधियारे में खड़ा कर दिया। फिक्सिंग के जाल से निकलकर आगे बढ़ते है विवादित शब्दवाली पर जहां से ‘बाल टेंपरिंग’ और ‘स्लेजिंग’ जैसे शब्दो का सामना होता है। इन्हें सुनते ही जहन में ऑस्ट्रेलिया का नाम आता है। बीते साल की घटना जिसमे दिग्गज खिलाड़ी स्टीवन स्मिथ,डेविड वार्नर के नाम सामने आते ही, आस्ट्रेलिया ही नहीं पुरे क्रिकेट जगत को झकझोर कर रख दिया था। लेकिन इसमें एक बात सामने आयी जिस तरह से क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया ने इन खिलाड़ियों पर नरमी न दिखाते हुए खेलहित में फैसला लिया जो की बोर्ड की जिम्मेदारियों को दर्शाता है। बहरहाल 2018 का साल अपने साथ इन सभी गहमा-गहमी, विवादो को अपने डायरी में समेट चुका था। साल 2019 आया लेकिन साल की शुरुआत में ही भारत के साथ विवाद जुड़ गया। ये खबर दो युवा खिलाड़ी हार्दिक पांड्या और के.एल राहुल से जुडी़ है जब इन्होंने एक टीवी साक्षात्कार में लड़कियों पर अश्लील और अभद्र टिप्पणी करके विवादों में आ गये। ये यही नहीं चुप रहे इन्होंने यहां तक अपने माता-पिता को भी इस विवाद का हिस्सा बना लिया। यूं तो ये खेल जिसे ‘जेंटलमैन गेम’ कहां जाता है उसे मौजूदा वक्त में पैसा, सोहरत, और अय्यासी का जरिया समझा जा रहा है, जो कि अपने आप में चिंता का विषय बनता जा रहा है।आए दिन ऐसे विवाद से खिलाडी़ ही नहीं बल्कि प्रशंसको को भी बहुत ही ठेस पहुंच रही है. फिर भी प्रशंसक करे भी तो क्या, खेल तो देखना ही है।मजबूरन पसंदीदा खिलाडी़ बदलनी पड़ती है।

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बहरहाल विवाद पर विचार BCCI और ICC को करनी चाहिए, जिससे ये आपत्तिजनक भाषा जैसे स्लेजिंग, फिक्सिंग, बॉल टेम्परिंग पर नकेल कस सके और क्रिकेट फिर से ‘जेंटलमैन गेम’ के अपने रूप में आ सके।

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