लाइफ़स्टाइल

हैप्पी टेडी डे 2019: आज है इस वीक का चौथा दि‍न यानी कि‍ टेडी डे

टेडी डे स्पेशल: वर्षा ऋतु ने लगभग दस्तक दे दिया था. बादल और सूर्य लुका-छुप्पी खेल रहे थे. कभी सूर्य बादलों से ओझल हो जाता. ठीक उसी तरह जैसे कि तुम खिड़कियों से. स्कूल के मैदान में हो रहा था क्रिकेट. बल्लेबाजी करते हुए जितना मेरा ध्यान गुलाबी गेंद पर था. उससे कई ज्यादा तुम्हारी गुलाबी होंठों पर. कुछ लड़कियां उधर पार्क में खेल रही थी जहां अब तुम्हारी भी उपस्थित हो गई थी. जब एक अंतराल के बाद हमारी फ़ील्डिंग की बारी आई तब मैं फिल्डिंग करने के लिए उधर ही खड़ा हुआ जिधर पार्क था. जहां एक बच्चा भी खेल रहा था अपने गुड्डे को लिए तुम्हारे साथ. उसी खेल-खेल में तुमने फेंक दिया था उस नाजुक से गुड्डे को मेरी तरफ और कहा था “कैच करो. पता नही मैं उसे कैच कर पाया था या नही अब इतना तो याद नही लेकिन हां तुम्हारा दिल मेरी हथेली में जरूर कैद हो गया था. शायद इस बात से तुम भी अंजान नही थी.

Image Source: toca

आज है इस वीक का चौथा दि‍न यानी कि‍ टेडी डे. कितना अलग था हम दोनों का प्यार. जब तुम पलट कर देखती तब मैं झेंप जाता था. तुम्हारे चेहरे को देखकर मैं ठिठक जाता, पलकें झपकती ही नहीं, तुम्हारी आँखों में कौतूहल था. वे आँखे पूछा करती थी कुछ निशब्द खामोशी से, कपकपाते होंठ से निकले शब्द साँसों से आकर टकरा जाते थे. उस खामोशी में हम दोनों कितना कुछ बतिया लेते थे. उन सब बातों को दिल में फिंच लेना चाहता था मैं और शायद तुम भी. हां हमने कभी इसका इजहार नही किया और शायद तुमने भी कभी इसकी जरूरत नहीं समझी. कितने दिन हो गए तुम से जुदा हुए. फिर भी तुम्हारी इश्क की कहानियां ताजा हैं मेरे जेहन में, पता नहीं तुम कब मिलोगी. हां इतना जरूर कह देता हूं जब मिलोगी चलेंगे वहीं जहां हमने कभी इश्क रचा था. वही स्कूल के पीछे वाली कैंटीन में बैठ कर खायेंगे समोसा और तुम घर से इश्क वाली चटनी लेकर आना.

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