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Jharkhand Assembly Result : न‍ किंग बने न किंगमेकर, काम न आई आजसू-झाविमो की रणनीति

पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी की पार्टी झाविमो और पूर्व उपमुख्यमंत्री सुदेश महतो की पार्टी आजसू किंगमेकर बनने के प्रयास में अकेले चुनाव लड़ रही थी.

Jharkhand Election Result 2019:  झारखंड विधानसभा चुनाव के क्रम पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी की पार्टी झाविमो और पूर्व उपमुख्यमंत्री सुदेश महतो की पार्टी आजसू किंगमेकर बनने के प्रयास में अकेले चुनाव लड़ रही थी. लेकिन उनके मंसूबे पूरे नहीं हुए. जनता की अदालत में दोनों पार्टियों के प्रत्याशी लगभग नकार दिए गए. सबसे अधिक और सभी 81 सीटों पर अपना प्रत्याशी देनेवाले झाविमो को महज तीन सीटों से ही संतोष करना पड़ा. बाबूलाल मरांडी ने धनवार से जीत हासिल कर अपनी प्रतिष्ठा बचाई तो प्रदीप यादव और बंधु तिर्की को भी जीत मिली. बाकी सभी प्रत्याशी फिसड्डी साबित हुए. आजसू की बात करें तो ‘हम तो डूबे ही सनम तुमको भी ले डूबेंगे’ वाली कहावत इसपर पूरी तरह चरितार्थ हुई.

एनडीए गठबंधन से अलग होकर 53 सीटों पर अपना प्रत्याशी देनेवाली तथा दहाई का आंकड़ा पार करने की घोषणा करनेवाली इस पार्टी को भी महज तीन सीटों से ही संतोष करना पड़ा. पार्टी के लिए अच्छी बात यह ही रही कि पार्टी के केंद्रीय अध्यक्ष सुदेश महतो की प्रतिष्ठा बच गई और वे चुनाव जीत गए. पिछले विधानसभा चुनाव के बाद वह उपचुनाव भी हार गए थे. आजसू को सबसे बड़ा नुकसान रामगढ़ में परंपरागत सीट खोने के रूप में हुआ. दो जगहों पर नए चेहरे ने पार्टी को जीत दिलाई.

जिन सीटों के लिए अड़ी थी, वहां भी हारी आजसू

आजसू भाजपा के साथ गठबंधन को लेकर चल रही शह-मात के खेल में लोहरदगा और चंदनकियारी सहित 19 सीटों की मांग पर अडिग थी. पार्टी का दावा था कि दोनों सीटों पर उसके प्रत्याशी मजबूत हैं, लेकिन इन दोनों सीटों पर पार्टी प्रत्याशियों की हार हो गई. दूसरी तरफ, कई ऐसी सीटें हैं जहां आजसू ने अपना प्रत्याशी देकर भाजपा को सीधे नुकसान पहुंचाया. आजसू से गठबंधन के प्रयास में ही भाजपा इसकी कई सीटों पर चुनाव की तैयारी नहीं कर पाई थी. उन सीटों पर भाजपा के प्रत्याशी सीट नहीं निकाल पाए. वहां आजसू के साथ-साथ भाजपा को भी नुकसान हुआ.

रामगढ़, बेरमो और टुंडी ऐसी ही सीटें हैं. हालांकि सुदेश अपनी पार्टी को बचाने में सफल रहे, क्योंकि गठबंधन में सीटें नहीं मिलने से यह आशंका थी कि पिछले चुनाव की तरह इस बार भी सीट नहीं मिलने पर उनके नेता पार्टी छोड़कर दूसरे दल में चले जाएंगे. पिछले चुनाव में पार्टी को तीन बड़े नेताओं से हाथ धोना पड़ा था. उन सभी नेताओं ने जीत हासिल की थी. इधर, पार्टी का संताल प्रमंडल में खाता खोलने का सपना भी पूरा नहीं हुआ.

खास बातें

  • – पूरा नहीं हुआ बाबूलाल मरांडी और सुदेश महतो का मंसूबा.
  • – तीन-तीन सीटों से ही संतोष करना पड़ा झाविमो और आजसू को.
  • – गठबंधन से अलग होना आजसू के लिए पड़ा महंगा.
  • – बाबूलाल और सुदेश महतो ने अपनी सीटें जीत बचाई प्रतिष्ठा.
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