नेशनल न्यूज़सॉफ़्ट स्टोरी

CAA और NRC : जानें क्या है नागरिकता संशोधन कानून और एनआरसी, यहां जानें सब कुछ

नागरिक संशोधन कानून यानि CAA को लेकर पूरे देश में विरोध प्रदर्शन जारी है. दिल्ली की जामिया मिलिया इस्लामिया यूनिवर्सिटी से निकली विरोध की इस चिंगारी ने देश भर में आग लगी दी है.

नागरिक संशोधन कानून यानि CAA को लेकर पूरे देश में विरोध प्रदर्शन जारी है. दिल्ली की जामिया मिलिया इस्लामिया यूनिवर्सिटी से निकली विरोध की इस चिंगारी ने देश भर में आग लगी दी है. भारत का संविधान अपने प्रत्येक नागरिक को विरोध करने का अधिकार देता है. लेकिन जब यह प्रदर्शन हिंसक हो जाए तो भयावह रूप ले लेता है. CAA का विरोध अब देश में इस कदर हिंसक हो चुका है कि इसने कई लोगों की जान ले ली है.

लोकतंत्र में विरोध जरूरी है. लेकिन विरोध करने से पहले विरोध की सही वजह जानना ज्यादा जरूरी है. जी हां..देश के कुछ मीडिया चैनलों ने प्रदर्शन वाली जगह पर पहुंचकर लोगों से बात की और उनसे जानने की कोशिश की कि वों लोग विरोध क्यों कर रहें हैं, तो ज्यादातर ने जवाब खामोश होकर दिया. प्रदर्शनकारियों से जब ये पूछा कि CAA और NRC क्या है, तो अधिकांशत: इसके बारे में कुछ भी नहीं जानते थे. ये सब सुनने में बहुत ही हास्यास्पद भी लगता है और ये बहुत दुखद भी है. दुखद इसलिए कि लोगों की इसी अनभिज्ञता का फायदा उठाकर कुछ असामाजिक तत्व उनको झूठ बोलकर या गलत जानकारी देकर गुमराह करते है और कुछ राजनेताओं के इशारे पर उनका राजनीतिक हित साधने में मदद करते है. ये सब हिंसक प्रदर्शन उसका ही परिणाम है.

असल में CAA और NRC को लेकर देश में तरह-तरह की अफवाहें फैली हुई है. आईये, CAA और NRC से जुड़ी सही जानकारी आप तक पहुंचाते है:-

1- क्या है नागरिकता संशोधन कानून 2019 ?

इस कानून के तहत अफगानिस्तान, बांग्लादेश और पाकिस्तान से आए हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और ईसाई शरणार्थियों के लिए नागरिकता के नियमों को आसान बनाया गया है. अब इसके लिए भारत में रहने की जरूरी अवधि को 11 साल से घटा कर 6 साल तक किया गया है.

2 – इन कानून में मुस्लिम शरणार्थियों को क्यों नहीं शामिल किया गया ?

इस कानून में भारत के 3 पड़ोसी मुस्लिम देशों के अल्पसंख्यक शरणार्थियों को नागरिकता देने का प्रावधान है और इन मुस्लिम देशों में मुसलमान अल्पसंख्यक नहीं हैं.

3 – क्या पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान के मुस्लिम कभी भारत की नागरिकता नहीं ले सकेंगे ?

ऐसा नहीं है, सिटिजनशिप ऐक्ट के सेक्शन 6 के तहत किसी भी विदेशी के लिए भारतीय नागरिकता हासिल करने का प्रावधान है.

4 – क्या अब भारत में रहने वाले मुसलमानों को भी अपने भारतीय होने का सबूत देना होगा ?

नहीं, भारतीय मुसलमानों को इसकी जरूरत नहीं पड़ेगी. ये कानून शरणार्थियों को नागरिकता देने के लिए बना है ना कि किसी की नागरिकता छीनने के लिए.

 5 – क्या CAA अनुच्छेद 371 के प्रावधानों का उल्लंघन है ?

नहीं, भाषाई, सांस्कृतिक और सामाजिक पहचान संरक्षित रहेंगी.

6 – क्या ये असम समझौते को कमजोर करेगा ?

नहीं, इस कानून से  असम समझौते पर कोई फर्क नहीं पड़ेगा.

7 – क्या नागरिकता संशोधन कानून असम की स्थानीय जनता के हितों के खिलाफ है ?

नहीं, ये कानून पूरे देश में लागू होगा, ये NRC के खिलाफ़ नहीं है. असम के लोगों की सुरक्षा के लिए सरकार प्रतिबद्ध है.

8 – CAA के प्रावधान नॉर्थ ईस्ट के आदिवासी क्षेत्रों पर लागू होंगे ?

ये समझना जरूरी है कि इनर लाइन परमिट के कारण ये कानून आदिवासी जमीन पर लागू नहीं होंगे. असम, मेघालय, मिजोरम और त्रिपुरा की आदिवासी जमीन पर लागू नहीं है.

9 – क्या बंगाली हिंदू असम के लिए बोझ बन जाएंगे ?

देश के दूसरे राज्यों में भी धार्मिक उत्पीड़न सहने वाले लोग हैं इसीलिए असम पर अतिरिक्त भार पड़ने का सवाल ही नहीं उठता है.

10 – क्या बांग्लादेशी हिंदू भारत आने के लिए प्रोत्साहित होंगे ?

बांग्लादेश के ज्यादातर अल्पसंख्यक पहले से ही विस्थापित हैं. 31 दिसंबर 2014 के बाद आने वाले किसी भी बांग्लादेशी अल्पसंख्यक को इस कानून का लाभ नहीं मिलेगा.

11 – क्या इस कानून से बांग्लाभाषियों का वर्चस्व होगा ?

नहीं, बराक घाटी में ज्यादातर बांग्लाभाषी और असमिया में सामंजस्य है.

12 – क्या नागरिकता संशोधन कानून भारतीय अल्पसंख्यकों के हितों को प्रभावित करेगा ?

इससे भारत में रहने वाले अल्पसंख्यकों को कोई फर्क नहीं पड़ेगा, वो पहले की तरह देश में भाईचारे के साथ सुरक्षित रहेंगे.

टैग

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

संबंधित समाचार

Back to top button
Close
Close