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भारतीय सेना की कार्रवाई से बौखलाया चीन, लद्दाख के कई इलाकों में बिछाई बारूदी सुरंगें, तैनात किए टैंक

पैंगोंग झील के दक्षिणी क‍िनारे पर भारत की कार्रवाई से टेंशन में आए चीन ने नए सैनिक और टैंक तैनात क‍िए हैं.

पूर्वी लद्दाख में पैंगोंग सो झील के दक्षिणी किनारे पर भारतीय सेना की जोरदार जवाबी कार्रवाई से बौखालाए चीन ने इस इलाके में कई जगहों पर और ज्‍यादा सैनिक तथा टैंक भेजे हैं. साथ ही लद्दाख के कई इलाकों में एलएसी के आसपास वे बारूदी सुरंग बिछा दी हैं, जिनका इस्तेमाल खाड़ी युद्ध में किया गया था. सैटलाइट से मिली तस्‍वीरों से पता चला है कि चीन के गतिरोध वाले प्‍वाइंट्स पर अपनी स्थिति को और ज्‍यादा मजबूत कर रहा है. इसके अलावा चीन इन इलाकों में नए सैन्‍य ठिकाने बनाने में जुट गया है.

टेलीग्राफ की रिपोर्ट के मुताबिक चीन की इस कार्रवाई से यह साफ नजर आ रहा है कि भारत और चीन के रक्षा मंत्रियों के बीच मास्‍को में वार्ता के बाद भी तनाव कम होने का नाम नहीं ले रहा है. चीन अब सभी गतिरोध वाली जगहों पर और ज्‍यादा सैनिक तथा टैंक तैनात कर रहा है. सूत्रों के मुताबिक दोनों ही पक्षों के करीब एक लाख सैनिक पूर्वी लद्दाख में तैनात हैं. चीन वार्ता की टेबल पर तनाव घटाने की बात तो कर रहा है लेकिन जमीन पर वह लगातार अपनी सैन्‍य तैयारी को और ज्‍यादा मजबूत करने में जुटा हुआ है.

भारतीय सेना ने भी अपनी तैनाती को बढ़ा द‍िया

इससे पहले 29 और 31 अगस्‍त के बीच चीन की सेना ने उकसावे की कार्रवाई करते हुए पैंगोंग झील के दक्षिणी किनारे पर यथास्थिति को बदलने का प्रयास किया था लेकिन भारतीय सेना ने उसे विफल कर दिया था. यही नहीं बाद में भारतीय सैनिकों ने पैंगोंग के दक्षिणी किनारे पर स्थित लगभग सभी प्रमुख चोटियों पर कब्‍जा कर लिया था. चीन के सैनिकों की तैनाती बढ़ाने से दक्षिणी किनारे पर तनाव काफी बढ़ गया है.

चीन की इस ताजा कार्रवाई का जवाब देने के लिए भारतीय सेना ने भी अपनी तैनाती को बढ़ा द‍िया है. बता दें कि मास्‍को में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने चीनी रक्षा मंत्री को बहुत कड़े अंदाज में अपना जवाब दिया था.

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने स्पष्ट शब्दों में कहा था कि पूर्वी लद्दाख में तनाव का एकमात्र कारण चीनी सैनिकों का आक्रमक रवैया है और ऐसा चलता रहा तो भारत अपनी संप्रभुता की रक्षा के लिए किसी भी हद तक जाने को तैयार है. उन्होंने रूस की राजधानी मॉस्को में चीन के रक्षा मंत्री जनरल वेइ फेंघे से हुई बातचीत के दौरान यह संदेश दे दिया है.

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